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2022 का चुनाव अकेले लड़ेगी सपा, नहीं होगा कोई गठबंधन - अखिलेश यादव

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Akhilesh Yadav


समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा है कि सन् 2022 में राज्य विधानसभा के होने वाले चुनावों में समाजवादी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। किसी भी अन्य दल से चुनाव गठबंधन नहीं होगा। समाजवादी पार्टी अपने काम और जनता के लिए किए जा रहे संघर्ष के बल पर चुनाव मैदान में उतरेगी और जनादेश प्राप्त कर अगली सरकार बनाएगी। भाजपा को जनता सन् 2022 में सत्ता से बेदखल करने का मन बना चुकी है।
श्री अखिलेश यादव ने आज समाजवादी पार्टी मुख्यालय, लखनऊ में एकत्र जिलों के प्रमुख कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो गई है। नोटबंदी-जीएसटी के दुर्भाग्यपूर्ण निर्णयों से जनता और व्यापारी त्रस्त हैं और उद्योगधंधे बंद हो रहे है। बाजार में मंदी है और हर रोज नौजवान रोटी-रोजगार से वंचित किए जा रहे हैं। रूपए की साख गिरती जा रही है। प्रदेश में कर्ज लेकर सरकार अपने झूठे प्रचार का ढोल पीट रही है।
श्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा की गलत नीतियों के चलते विकास की दौड़ में उत्तर प्रदेश पिछड़ता चला जा रहा है। किसानों की आय दुगुनी तो छोड़िये अभी भी कर्ज से परेशान किसान आत्महत्या कर रहा है। शिक्षामित्र बेरोजगारी में अपनी जान दे रहे है। नौजवान को नौकरी मिल नहीं रहीं, तमाम औद्योगिक संस्थानों से उनकी छंटनी हो रही है। भ्रष्टाचार असीमित है।
श्री यादव ने कहा कि प्रदेश में शांति व्यवस्था की बुरी हालत के चलते प्रदेश में न तो उद्योग लग रहे हैं और नहीं निवेश हो रहा है। पुलिस निर्दोषों का एनकाउण्टर कर रही है। गरीब की कहीं सुनवाई नहीं। महिलाओं और किशोरियों के साथ दुष्कर्म में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है। भाजपा प्रदेश में आतंकवाद का माहौल बनाकर राज कर रही है। असहमति उसे बर्दाश्त नहीं है। सुप्रीमकोर्ट का भी मानना है कि यू.पी. में अराजकता व्याप्त हो गयी है। स्वास्थ्य और शिक्षा में राष्ट्रीय औसत में उत्तर प्रदेश की ग्रोथ कम है।
पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा की नीतियों से देश के लोकतंत्र को खतरा है। भाजपा की राज्य सरकार गरीबों, पिछड़ों और दलितों के साथ अन्याय कर रही है। सरकार अपराधियों को सजा क्या देगी जब वह स्वयं उनके साथ खड़ी है?
जनता लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों और आदर्शों की उपेक्षा से आजादी खतरे में पड़ सकती है। जनता ही इस लड़ाई को जीत में बदल सकती है। समाजवादी पार्टी और जनता का परस्पर भरोसा है।

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